भारत कि आजादी मे मुसलमानो का योगदान है या नही ?? क्या सभी मुस्लिमो को पाकिस्तान भेज देना चाहिये? Role of Muslims In Indian Freedom Struggle

दोस्तो नमस्कार, मे भी आपही के जैसा आम हिंदुस्थानी नागरिक हू, जिसे दुनिया भर कि खबरे और देशभर की खबरे पढना या देखना पसंद है, मुझे भी देश की उन्नती, देश का होता विकास, देश का जो डंका पुरी दुनिया मे हो रहा आहॆ उसासे काफी ख़ुशी होती है। देश को जागतिक स्तर जो मान्यता हॆ वो इससे पहले कभी ना थी. मे देश-दुनिया भर की खबरे पढता था बोहोतसी किताबे अबतक पढ चुका हू, पर पढने मी ज्यादा समय चला जाता है और अब काम कि वझह से पढनेको फुरसत भी नाही मिलती। पर इस समस्या मे TECHNOLOGY ने मुझ जैसे ही अनेको की बहोत हि मदद कि है, वो कैसे वो मी अब आएको विस्तार से बताता हू।






        दोस्तो, आज Main टॉपिक पर आनेसे पहले कुछ बताना जरूरी समझता हु। इसलिए शुरुवात ऐसी कर रहा हु तो ताकि आपतक मेरा कहना सही से पोहच जाए। जैसे कि मेने अभि आपको बताया की मुझे पढ़ने के लिए समय नहीं मिलता, तो मेने ४-५ साल पहले सारी किताबे पढ़ने से अच्छा सुनना शुरू किया, और खबरों के लिए ऑनलाइन ही यूट्यूब के माध्यम से सारी खबरे देखना शुरू किया, तब मुझे जो पसंद है वो कुछ टीवी चैनल्स और कुछ स्वयं ही पत्रकार बन गए है उन कुछ लोगोने बताई हुई खबरे फुरसत में सुन लेता था, क्युकी उसमे वक्त भी कम लगता था और खबरे चित्र रूप में रहे तो खबरे सुनाने में और भी मजा आता था। उसमे हर खबर में बलात्कार, खून, चोरी, डकैती जैसी ही खबरे पढ़ने मिलती थी खबरे अच्छी भी होती है और बुरी भी, में यह जानता हु पर मुझे अच्छी खबरे ही नहीं दिख रही थी जैसी हम बचपन से देख रहे है या पढ़ रहे है।अब जो खबरे यूटुब के माध्यम से देखने सुनने मिल रही है, उसमे एक चीज Common है की खबर कोई भी हो उसमे धर्म को बीचमे लाकर खड़ा करती हैं। जैसे बलात्कारी, खुनी, ड्रग पेडलर, या कोई बड़ा गुनहगार जिसने कुछ गलत किया हो वो अगर मुस्लिम है, तो उसे बोहोत ही ज्यादा हाइलाइट करके दिखाया जाता है। मेरा तो ये मानना है की बलात्कारी, चोर, खुनी या गुनाहगार का कोई धर्म नही होता। वो बस एक गुनाहगार होता है। बार बार उसके धर्म का नाम लेकर उस धर्म की बदनामी की जाती है।अगर कोई व्यक्ति इसी प्रकार की कोई वीडियो देखे तो उसको यूट्यूब पर भी वही मुस्लिम धर्म विरोधी खबरे, मुस्लिमविरोधीभाष्य , मुस्लिम धर्म विरोधी इनफार्मेशन बार बार सामने आती रहती है और फिर वो व्यक्ति इसी जानकारी को सत्य समझ उसे क्रॉसचेक किये बिना वो व्यक्ति आगे औरो को भी फॉरवर्ड करता है। बच्चे, बूढ़े, जवान अभी आजकल यूट्यूब देखते है, तो उनको इसी गलत खबरे और गलत जानकारी देखकर वो सब सही लगने लगती है और उससे उनके मनमे भी मुस्लिम धर्म के प्रति नफ़रत पैदा हो जाती है।

           अभी अभी १५ अगस्त हुई है, और फिरसे कुछ कट्टरपंथि मुसलमान भाइयो से फिर एक बार पूछने लगे है, हिंदुस्तान की आझादी में मुसलमानो का योगदान क्या है? तो चलिए उनके इस प्रश्न का उत्तर कुछ उदाहरणों से उनको देते है।
        दोस्तों, अब आप कहेंगे की मेने इतना लिख दिया पर Main टॉपिक तो कुछ और था और में उसी की तरफ बढ़ रहा हु। हमारा आजका जो टॉपिक है, भारत कि आजादी मे मुसलमानो का योगदान।

        आजकल अगर किसी गुनाहगार ने कोई गुनाह किया तो पहले उसका धर्म और जाती देखकर ही फैसला करने के लिए बोहोतसे कट्टरपंथी तैयार बैठते है, और अगर वो गुनेहगार मुस्लिम निकला तो कुछ लोग कानून हाथ में उठाने के लिए भी नहीं सोचते, आज आजादी के ७६ सालो बाद भी कुछ लोग किसी धर्म, जाती को निचे दिखाना अपना और अपनी धर्म जाती का गौरव मानते है। इन ७५ सालो मे बोहोत आगे देश चला गया, लोग पढ़ लिख गए पर कुछ लोग आज भी धर्म धर्म में भेद करते है। ये देख कर बोहोत दुःख होता है। ऐसे में ही कुछ कटटरपंथी कुछ सालो से मुस्लिमोके लिए एक वाक्य बोलते है की "इन लोगों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए" , "इन लोगों को इस देश में लेना ही नहीं चाहिए था" इसी बाते खुलकर सबके सामने करते है जो इनदिनों बोहोत ही नार्मल हो गया है. ऐसी बाते करने वाले बोहोतसे तो राजनेता भी है, कुछ सरकार के पालतू कुत्ते या उनको मंत्री भी कहा जाता है वो लोग भी इसी बाते करते है इसमें भी शर्म की बात और की ऐसी सरकारों में खुद मुस्लिम समाज के लोग भी शामिल है। जिन्हे ऐसे आपत्तिजनक बातो से भी कोई फर्क नहीं पड़ता क्युकी उनको तो राजनीती ही करनी है. राजनीती करने के लिए ही कुछ लोग मुसलमानो में भारत कि आजादी मे मुसलमानो कोई योगदान नहीं था ऐसी झूटी बाते फैलाई जाती है और मुसलमानो को पाकिस्तान भेज देना चाहिए ये भी एक राजनीती के लिए किया गया जुमला है।

भारत कि आजादी मे मुसलमानो का योगदान है या नही ??


ये प्रश्न पूछ कर जो इतिहास न जानने वाले अनपढ़ कटटरपंथी/अंधभक्त उनको एक उत्तर देना चाहता हु। तो आप भी इसे पढ़े और उनको ये सब पढ़ने को दीजिये ताकि वो किसी को कभी ये बेवकूफी वाला प्रश्न ना पूछे।


भारत की आझादी में मुस्लिम क्रांतिकारी

१. यूसुफ मेहर अली


SIMON GO BACK ये नारा तो आपने स्कुल में इतिहास के पाठ में पढ़ा ही होगा, यह नैरा देने वाले भी एक मुस्लिम ही थे। जिनका नाम युसूफ मैहर अली था। जिन्होंनेही ब्रिटिशोंके खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन का नारा दिया था। युसुफ मैहर अली का जन्म ०३ सप्तम्बर १९०३ साल में मुंबई शहर में हुआ था। बढ़ती उम्र के साथ साथ क्रांतिकारियोंके स्वतंत्रता संग्राम की और प्रभावित होकर उन्होंने खुदको देश के आजादी के लिए स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए। दांडी यात्रा और सविनय क़ायदेभांग में उनका भी भाग था, स्वतंत्रता के लिए किये गए आंदोलन के लिए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा था। १५ अगस्त १९४७ में स्वतंत्र भारत में महज ३ साल दिल की बीमारी के चलते उन्हें २ जुलाई १९५० को उनकी मृत्यु हु।




२. मोहम्मद अली जोहर

मोहम्मद अली जोहर का जन्म १० दिसंबर १८७८ में रामपुर गांव, उत्तरप्रदेश में हुआ था। उन्होंने आधुनिक इतिहास और कानून के विषयो में डिग्री लेकर १८९९ हिन्दुस्थान वापस आकर ‘खिलाफत आंदोलन’ में प्रत्यक्ष रुप से भाग लिया। उन्होंने स्वतंत्रता के प्रति अपना कर्त्तव्य और अंग्रेजोके खिलाफ खड़े होकर लोग जागरूक हो इसलिए उर्दू दैनिक 'हमदर्द' शुरू किया। जिसमे उन्होंने ब्रिटिशो के विरोध में बोहोत ही कठोर लेखन किया। जिसकी वजह से उन्हें अपनइ जीवनकाल का कुछ समय जेल में भी रहना पड़ा। पर फिर भी उनकी देश के प्रति जो मोहब्बत थी वो कम् न हुई। उन्होंने अपने साहित्य और कविताओं की रूचि की मदद से लोगोमे उत्साह निर्माण किया और उसका लाभ भी हुआ, उनके समर्थन में कई भारतीय मुसमानो ने समर्थन किआ और इस स्वतंत्रता संग्राम में आ गए।



३. मौलाना आझाद

मौलाना आझाद का जन्म ११ नवंबर १८८८ में मक्का, सऊदी अरब में हुआ था। मौलाना आज़ाद ने उस वक्त के बहोतसे मुसलमान लोगोके के लिए कट्टरपंथी माने जाने वाले कुछ राजनीतिक विचारों को विकसित किया और वो एक पूर्ण तरह से भारतीय राष्ट्रवादी बन गए। ज्यादा से ज्यादा लोगोंतक पोहचना और लोगो को आजादी के आंदोलन में साथ चलने के लिए आगे आये । इसलिए उन्होंने १९१२ में अल हिलाल नाम का एक उर्दू साप्ताहिक की सस्थापना कलकत्ता में की, जिसमे वे अंग्रेजो सरकार के जुल्म जो भारतीयों पर हो रहे थे और जो अंग्रेज सरकार की गलत निति के खिलाफ वे लिखते थे. उन्होंने मुसलमान युवाओ को आजादी और हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। जिससे अधिकांश लोग इस राष्ट्रवादी विचार से जुड़ने लगे। दांडी यात्रा और नमक के सत्याग्रह के वक्त गांधीजी के साथ मिलकर ब्रिटिशो का विरोध किया। 15 अगस्त 1947 से 2 फरवरी 1952 तक वे देश के प्रथम शिक्षा मंत्री भी रहे थे।


 


४. आबिद हसन सफ्रानी

ज़ैन-उल-आब्दीन हसन का जन्म 11 अप्रैल 1911 को हैदराबाद में हुआ था। जब वे जर्मनी में अध्ययन कर रहे थे, कुछ समय बाद उनकी मुलाकात नेताजी सुभाष चंद्र बोस से हुई और वे स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गये, देशसेवा के लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई का कोर्स भी छोड़ दिया। उसी दरम्यान वे नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ उनके निजी सचिव और दुभाषिया के रूप में जुड़ गए। कुछ गुप्त मिशनों और योजना के चलते उन्हें इस देश कार्य के लिए कुछ समय के लिए जेल में डाल दिया गया। आबिद हसन सफ़रानी ने ही अजेय "जय हिंद" का नारा दिया, जिसका उपयोग आज भी हमारी सरकार और हमारे भारत के नागरिक करते हैं।



५ . खान अब्दुल गफ्फार खान

बचा खान, बादशाह खान, सरहदी गांघी इन सभी नाम से जो पहचाने जाते थे उनका जन्म 6 फेब्रुअरी 1890 को हुआ था। खान अब्दुल गफ्फार एक अहिंसावादी स्वतंत्रसैनिक थे। जिन्होंने अपने पूर्ण जीवनकाल में हमेशा शांतिप्रियता, अहिंसा और समानता के लिए जाने गए. गांद्धिज्ज के साथ मिलकर उन्होंने नमक सत्याग्रह और भी कई आंदोलनों में हिस्सा लिया था. हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए भी हिमायती थे । खान साहब ने भारत के बटवारे का कड़ा विरोध किया था जिसकी वजह से वो कुछ मुस्लिम नेताओंने उनपर मुस्लिम विरोधी होनेका आरोप भी लगाया था. पर वो अपने मातृभूमि के प्रेम और मानवता के प्रति समझौता करने के लिए तैयार नहीं थे. वो तो मुहम्मद अली जिन्ना के राज को भेड़िया राज तक कहने को डरे नहीं। उनको १९८७ साल में भारतरत्न पुरस्कार से सन्मानित किया गया था.





६ . अश्फाकुल्ला खान

अश्फाकुल्ला खान का जन्म 22 अक्टूबर १९०० में हुआ था। वे स्वतंत्रता संग्राम के ही एक क्रन्तिकारी थे। उन्होंने अंग्रेजोके खिलाफ प्रखर विरोध किया और साथ ही वे हिन्दुस्थान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापक भी थे। अश्फाकुल्ला खानने क्रांतिकारी कार्य आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक गोला बारूद इकठ्ठा करने के लिए इन्होने उनके साथियोंके साथ काकोरी कांड जैसी बोहोत बड़ी योजना बनाई और ९ अगस्त १९२५ में काकोरी जा रही रेलगाड़ी में जो खजाना जा रहा था वो लूट लिया। इस काकोरी कांड से ब्रिटिश सरकार के मुँह पर तमाचा मारा गया जिससे ब्रिटिश हुकूमत तिलमिला उठी। इस काकोरी कांड के बाद ब्रिटिश सरकार को कई दिनों तक कोई सबूत हाथ नहीं लगे. पर एक दोस्त ने ही लालच में आकर अश्फाकुल्ला खान का पता अंग्रेजो को दे दिया और वे पकड़े गए. उन्हें बोहोत ही कम उम्र में 19 दिसम्बर 1927 को फांसी की सजा हो गई।


           यह कुछ ही क्रांतिकारिओं के उदाहरण मैंने आपको बताये, जिन्होंने अपने जीवनकाल का लम्बा अरसा इस मातृभूमि की आज़ादी के लिए लगा दिया। कुछ लोग शहीद भी हो गए। अब आप ही तै कीजिये की वतन के लिए मर मिटने के लिए तैयार थे और आज भी है, ऐसे लोगोको देशद्रोही या आतंकवादी घोषित करने का अधिकार कुछ कट्टरपंथियोको किसने दिया?? मुसलमानो को पाकिस्तान चले जाओ ऐसे बोलनेका अधिकार किसने दिया?? आप सभी समझदार है। और मुझे ऐसे लगता है, की मेने मेरे दिमाग के अंदर कुछ दिनों से जो चल रहा था वो कुछ उदाहरणों के जरिये पोहचा दिया है। यह देश जितना एक हिन्दू का है उतना ही मुसलमान का है, उतना ही सिख, जैन, बौद्ध, ख्रिश्चन, पारसी सभी धर्मो का है। तो में आप सबसे यही विनती करूंगा की कृपया आप राजनेताओ की बातो में ना आकर भाईचारा बनाये रखिये जो सिख हमे हमारे महापुरुषोने दी है.

समय और शब्दों की सीमाए उसीके साथ मेरे व्याप्त दिनचर्या से मिले हुए थोड़े समय में इतना ही लिख पाया हु, आगे और बोहोत कुछ है जो आपके साथ शेयर करना चाहूंगा। जल्द ही मिलेंगे।


आखिर तक पढ़ने के लिए आपका दिल से शुक्रिया।

जय हिंद…



आपका अपना दोस्त।







कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें